भुवनेश्वर: जल्द ही होने जा रहे ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार पर चौतरफा हमला करने के लिए विपक्ष के पास कई मुद्दे हैं। उनमें से एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर विधानसभा में हंगामा होने की पर्याप्त संभावना है। एमएमडीआर संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए विपक्षी कांग्रेस और बीजद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग करते आ रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा का तर्क है कि झूठे तथ्यों के बल पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। संसद में एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित होने के संदर्भ में इसके खिलाफ बीजद अध्यक्ष तथा विपक्ष के नेता नवीन पटनायक द्वारा एकजुट होने का आह्वान किए जाने के बाद राजनीति तेज हो गई है। खनन क्षेत्रों के निवासी, आदिवासी, सर्वोपरी ओडिशा के हितों को यह कानून भारी नुकसान पहुंचाएगा, ऐसा बीजद और कांग्रेस लगातार आलोचना करते आ रहे हैं। बीजद विधायक अरुण साहू ने कहा है, इस कानून में संशोधन कर केंद्र सरकार ने राज्य के हाथों से सारी शक्तियां छीन ली हैं। ओडिशा के खनिज संसाधन, खनन भूमि और आर्थिक अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में चले गए हैं। हर दृष्टि से ओडिशा को बहुत नुकसान होगा। इसके खिलाफ बीजद अभियान चलाने के साथ हर गांव में लोगों को इस साजिश के बारे में जागरूक करेगा। मंत्री और सत्तारूढ़ विधायक अब गांवों में प्रवेश नहीं कर पाएंगे, श्री साहू ने कहा है। कांग्रेस विधायक दल ने शनिवार को राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर एमएमडीआर मुद्दे पर विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने की मांग की है। पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा है, जब ओडिशा के हित केंद्र सरकार के पास बलि चढ़ रहे थे, तब संसद में ओडिशा भाजपा के २० सांसदों ने मुंह नहीं खोला। ओडिशा के खनिज संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी। रविवार को सभी जिलों में सर्वदलीय बैठक आयोजित करने के साथ विरोध दिवस के रूप में २५ तारीख को सभी जिलों में मुख्यमंत्री और भाजपा सांसदों का विरोध करते हुए कांग्रेस प्रदर्शन करेगी। इसके साथ ही आर्थिक नाकेबंदी शुरू होगी। अभी चल रही खदानों को बंद करने के साथ ओडिशा बंद के लिए कदम उठाए जाएंगे, श्री दास ने कहा है। इस संबंध में भाजपा के राज्य महासचिव बिरंचि नारायण त्रिपाठी ने कहा है, ओडिशा में विपक्षी दलों के नेता विभिन्न प्रकार के झूठे तथ्य देकर ओडिशावासियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। विकसित भारत में खनिज संसाधनों के सदुपयोग के साथ उनके मूल्यवर्धन के लिए यह शानदार कानून लाया गया है। पहले खनन कर व्यवस्था में जो प्रावधान था, उसे अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है। जीएसटी लागू होने के समय की तरह एमएमडीआर के संदर्भ में भी विपक्ष लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, उन्होंने कहा है।
उल्लेखनीय है, विधानसभा का मानसून सत्र नजदीक आने के दौरान पाठ्यपुस्तक विवाद, बाढ़ नियंत्रण में विफलता, बदहाल कानून-व्यवस्था, धान पंजीकरण में समस्या, नए पुलिस डीजी की नियुक्ति जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष तैयार था। हालांकि इस महीने के दूसरे सप्ताह में संसद के दोनों सदनों में एमएमडीआर संशोधन विधेयक पारित होने के बाद नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ने इसे मुख्य हथियार बना लिया है। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग पर वे अड़े हुए हैं। विशेष सत्र हो या मानसून सत्र; अन्य मुद्दों पर एमएमडीआर भारी पड़ेगा, ऐसा कहा जा रहा है।

