भुवनेश्वर: संसद में खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक या एमएमडीआर संशोधन विधेयक-२०२६ पारित होने के प्रसंग में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने चिंता व्यक्त की है। यह ओडिशा की आर्थिक स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों पर संवैधानिक अधिकार के लिए एक बड़ा खतरा है बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को चिट्ठी लिखी है नवीन ने। तत्काल सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष अधिवेशन बुलाने का श्री पटनायक ने प्रस्ताव दिया है।
नवीन ने चिट्ठी में उल्लेख किया है कि राज्यसभा में बीजेडी सांसद ने इस विधेयक का विरोध करने के साथ आपत्ति उठाई थी। नई व्यवस्था के अनुसार, ओडिशा जैसे खनिज समृद्ध राज्यों का विकासात्मक एजेंडा प्रभावित होने के साथ पर्याप्त राजस्व का नुकसान होगा। धारा २ के तहत केंद्र सरकार के नियंत्रण को व्यापक करते हुए खनन नियंत्रण के साथ ‘खनिजयुक्त भूमि’ को भी शामिल किया गया है। धारा ९-डी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों को छोड़कर राज्य सरकारें खनिज अधिकार या खनिजयुक्त भूमि पर कोई कर, सेस या समान प्रकार का लेवी लगाने से वंचित होंगी। धारा १३ के संशोधन के जरिए राज्यों की कर निर्धारित करने की क्षमता को सीमित करने के लिए केंद्र सरकार को एकमात्र अधिकार प्रदान किया गया है। ओडिशा के संघीय अधिकार और खनिज राजस्व की सुरक्षा के लिए एक समान मत तैयार करने हेतु तत्काल एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। इस संशोधन कानून का विरोध करने और केंद्र सरकार द्वारा राज्य की शक्तियों के अधिग्रहण के विरोध में ओडिशा विधानसभा का एक विशेष अधिवेशन बुलाकर सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने का नवीन ने प्रस्ताव दिया है। ओडिशा के प्राकृतिक संसाधन यहां के लोगों के हैं और खनन कार्यों से आने वाला राजस्व राज्य की स्वास्थ्यसेवा, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अत्यंत जरूरी है, ऐसा श्री पटनायक ने पत्र में उल्लेख किया है।
