तेल अवीव/इस्लामाबाद : ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की क्षीण आशा पैदा हुई थी, फिर भी इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ‘युद्ध जिद’ ने अब पूरे विश्व को फिर से चिंता में डाल दिया है। हिज़्बुल्ला प्रमुख के भतीजे के मारे जाने के बाद नेतन्याहू की हुंकार ने पश्चिम एशिया को फिर एक भयानक रक्तपात की ओर धकेल दिया है। स्पष्ट शब्दों में उन्होंने चेतावनी दी है कि शांति प्रक्रिया कुछ भी हो, हिज़्बुल्ला के खिलाफ ‘सर्वग्रासी सैन्य अभियान’ रुकने का सवाल ही नहीं उठता। नेतन्याहू के इस युद्धोन्मुखी रुख के कारण कल इस्लामाबाद में होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। इज़राइल की ओर से मात्र 10 मिनट में 100 सैन्य ठिकानों पर किए गए विनाशकारी बम हमलों को ईरान ने ‘शांति समझौते का खुला उल्लंघन’ बताया है।ईरान के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबाफ़ ने गहरे आक्रोश के साथ कहा है कि अमेरिका और इज़राइल की विश्वासघात के कारण तेहरान इस वार्ता से हटने पर विचार कर रहा है। एक ओर कूटनीतिक स्तर पर शांति की बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी ओर नेतन्याहू की ‘लोहे की मुट्ठी’ किसी भी प्रस्ताव को मानने के लिए तैयार नहीं है। लेबनान की धरती पर जारी यह भीषण संघर्ष स्पष्ट करता है कि पश्चिम एशिया में शांति अभी भी एक दूर का सपना है। इज़राइल की यह अडिग आक्रामक नीति अब पूरे विश्व के शांति प्रयासों को अनिश्चितता के बीच धकेल रही है।

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